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वृश्चिकासन (Scorpion Pose)

संस्कृत में वृश्चिक बिच्छू को कहते हैं। इस आसन में शरीर का आकार बिच्छू की तरह हो जाता है इसलिये इसका नाम वृश्चिकासन (Vrischikasana) पड़ा। इसे अँग्रेज़ी में Scorpion Pose कहते हैं।

Vrischikasana

वृश्चिकासन करने की विधि (How to do Vrischikasana Pose in Hindi)

इस आसन को पेट के बल लेटकर, कंधों को कोहनियों के सहारे ऊपर उठाकर, पैरों की ओर सिर पर्यंत मोड़कर किया जाता है। प्रारम्भ में इस आसन को दीवाल के सहारे करना चाहिए।

Step 1: सर्वप्रथम आसन पर पेट के बल लेट जाएं। अब दोनों हाथ (कुहनियों तक) ज़मीन पर टिका दें। पंजे खुले रहें।

Step 2: अब शीर्षासन की तरह सिर को हाथों के बीच टिकाकर पैरों को दीवाल के सहारे टेक दे। पैर ऊपर जाने पर सिर को उठाने का प्रयत्न करें।

Step 3: अब पैरों को दीवाल से दो-तीन इंच दूर कर शरीर को स्थिर रखने का अभ्यास करे।

Step 4: इसके पश्चात् पैरों को धीरे से घुटनों तक मोड़कर पैर की उँगलियों व तलुओं को सिर पर रखने का प्रयत्न करे।

इस आसन को करने में आपको कठिनाई हो सकती है। लेकिन कुछ दिनों के अभ्यास से सिर और पैरों से वृश्चिक की तरह आकृति बनने लगेगी। जिन्हें वृक्षासन व शीर्षासन का अभ्यास है वे इसे शीघ्र कर लेते हैं।

समय: यह आसन कठिन है अतएव आसानी से जितने समय तक हो सके, करें।

वृश्चिकासन से लाभ (Benefits of Vrischikasana in Hindi)

इस आसन से पेट, हाथों व कमर के अङ्ग मजबूत होते है तथा शरीर मे स्फूर्ति आती हैं। यह आसन जठराग्नि को तीव्र एवं समस्त उदर रोगों को दूर करता है। इससे मस्तिष्क और पीयूष ग्रंथि में रक्त संचार बढ़ता होता है।

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