/ / उष्ट्रासन (Camel Pose)

उष्ट्रासन (Camel Pose)

इस आसन में हमारे शरीर की आकृति कुछ-कुछ उष्ट्र (ऊँट) के समान प्रतीत होती है, इसी कारण इसे ‘उष्ट्रासन’ (Ustrasana) कहते हैं। इसे अंग्रेज़ी में Camel Pose कहते हैं।

Ushtrasana

Sort Introduction:

नाम: उष्ट्रासन
अंग्रेज़ी नाम: Camel Pose
आकृति: ऊँट के समान
आसन की प्रकृति: व्यायामात्मक।
जटिलता: मध्यम
प्रभावित अंग:
गर्दन, छाती, रीढ़ पेट, फेफड़े, घुटने।
समय: 5-10 सेकिंड

उष्ट्रासन करने की विधि (How to Do Ustrasana)

Step 1: इस आसन के लिए वज्रासन में बैठकर दोनों घुटनों के बीच कुछ दूरी बनाएँ।

Step 2: इसके बाद घुटने के बल खड़े होकर श्वास अंदर लेते हुए कमर, छाती व सिर पीछे की ओर झुकाएँ। ध्यान रहे पीछे झुकते समय जंघा सीधी रखें।

Step 3: दोनों हाथों से पैरों के टखनों को पकड़े और इस अवस्था मे सांस रोककर यथाशक्ति (5-15 सेकिंड) रुकने का प्रयास करें। फिर श्वास छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आएँ।

वज्रासन की स्थिति में बैठकर थोड़ा सा विश्राम करते हुए यह प्रक्रिया 2-3 बार दोहराएं।

विशेष: जोर से या झटके से इस आसन को न करें। यथाशक्ति रुकने के पश्चात् हाथों को छोड़कर गरदन, कमर और पीठ सीधा करेंगे। और पढ़ें: चक्रासन (Wheel Pose)

उष्ट्रासन करने के फायदें (Benefits of Camel Pose)

उष्ट्रासन गर्दन छाती, लंग्स, रीढ़, पेट, लिवर, किडनी, ब्लेडर, आंत और घुटने को एक साथ प्रभावित करत है, जिससे इनका निरोगीपन बना रहता है।

  • यह आसन से रीढ़ की हड्डी लचीली बनती हैं। पेट और नितंबों की फालतू चर्बी दूर होती है।
  • उष्ट्रासन को रोजाना करने से भोजन पचाने की क्रिया तेज़ होती है, गैस कब्ज का रोग दूर होता है।
  • गले संबंधी रोगों में भी यह आसन लाभदायक है।
  • इस आसन को करने से मधुमेह रोग में भी बहुत लाभ होता है। और पढ़ें: मधुमेह रोगियों के लिए डाइट प्लान

अर्ध-उष्ट्रासन करने की विधि (How to Do Ardha Ustrasana)

यह उष्ट्रासन की अर्ध प्रक्रिया है इसलिए इसका नाम ‘अर्ध उष्ट्रासन‘ पड़ा। इसे अंग्रेज़ी में Half Camel Pose कहते हैं।

Step 1: एक स्थान पर वज्रासन में बैठ जावें।

Step 2: अब हाथों को कमर के पीछे कूल्हों पर रखते हुए हाथों की अँगुलियों को नीचे की तरफ रखकर घुटनों के बल खड़े हो जाएँ।

Step 3: श्वाँस लेते हुए सिर एवं गर्दन को धीरे-धीरे पीछे की तरफ झुकाते हुए कमर के ऊपर के हिस्से को भी धीरे-धीरे पीछे की तरफ जितना झुका सकें, उतना झुकाएँ। इस स्थिति में 10 से 20 सेकंड तक रहें।

Step 4: अब श्वाँस लेते हुए सिर, गर्दन तथा कमर के ऊपर के हिस्से को धीरे-धीरे सीधा करते हुए घुटनों को मोड़कर वापस वज्रासन में बैठ जावें।

वज्रासन की स्थिति में बैठकर थोड़ा सा विश्राम करते हुए फिर से दोहराएँ। ऐसा 2-3 बार करें।

लाभ: अर्ध-उष्ट्रासन के अभ्यास से पाचन रोगों एवं कमर दर्द में लाभ होता है। रक्त परिसंचरण तंत्र में सुधार होता है। गर्दन, पैरों, घुटनों व रीढ़ की हड्डी की माँसपेशियों में लचीलापन बना रहता है। और पढ़ें: त्रिकोणासन (Triangle Pose)

उष्ट्रासन के दौरान सावधानी (Ustrasana / Camel Pose Precautions)

हर्निया तथा पेट दर्द, आर्थराइटिस एवं वर्टिगो रोगों वाले व्यक्ति तथा गर्भावस्था वाली महिलाएँ इसका अभ्यास नहीं करें।

4.9/5 - (87 votes)