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प्रणामासन (Prayer Pose)

Prayer Pose: प्रणामासन, ‘प्रणाम और आसन’ दों शब्दो से मिलकर बना है। प्रणाम का मतलब ‘नमस्ते या प्रार्थना’ और आसन मतलब योग।

प्रणाम (नमस्ते) करना, भारतीय संस्कृति की एक परम्परा हैं। यह अन्य व्यक्ति से सम्मानजनक या श्रद्धापूर्ण अभिवादन का एक रूप है। आमतौर पर इसका प्रयोग ईश्वर प्रार्थना, अपने से बुजुर्ग अथवा सम्मानीय व्यक्ति का अभिवादन करने के दौरान किया जाता है।

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चूंकि इस योगासन में प्रणाम मुद्रा बनाया जाता है, इसलिए इसे ‘प्रणामासन‘ (Prayer Pose) कहते है। प्रणामासन सूर्य नमस्कार आसन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रणामासन कई प्रकार के होते है।

  1. प्रणामासन- खड़े होकर नमस्कार मुद्रा में ईश्वर का ध्यान करना।
  2. एक पाद प्रणामासन- एक पैर पर खड़े होकर प्रणाम मुद्रा में ध्यान करना।
  3. पद्मासन प्रणामासन- पद्मासन मुद्रा में बैठकर प्रणाम करना। इसी प्रकार अन्य मुद्रा में बैठकर भी प्रणाम मुद्रा का अभ्यास किया जा सकता है जैसे वज्रासन।
  4. साष्टांग प्रणामासन- इसमे लेटकर प्रणाम किया जाता है। यह मुद्रा सूर्य नमस्कार के दौरान भी बनता हैं। और पढ़ें: सूर्य नमस्कार (Sun Salutation)

प्रणामासन करने की विधि (How to Do Prayer Pose)

Step 1: सर्वप्रथम आसन पर दोनों पैरों को मिलाकर सीधे खड़े हो।

Step 2: फिर दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से जोड़कर नमस्ते मुद्रा में सीने के सामने लाएँ। और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं।

Step 3: एकाग्रता के साथ खड़े होकर इस अवस्था में यथासभंव रहें। श्वांस सामान्य रखें। आंख बंद अथवा खुली कुछ भी रख सकते हैं।

समय: इसे करने का सही समय ब्रह्म मुहुर्त या सुबह 6 बजे से पहले बताया गया है। और पढ़ें: अष्टांग नमस्कार (Eight Limbed Pose)

प्रणामासन से लाभ (Benefits of Prayer Pose)

अन्य योगासनों की तरह ही इस आसन के नियमित अभ्यास से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।

  • इस मुद्रा से अंतर्मुखता, विश्राम, शांति की अवस्था उत्पन्न होती है।
  • इस नमस्कार मुद्रा में हथेलियों के दबाव से सीने के आस-पास सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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