गुड़मार (Gymnema sylvestre)

गुड़मार एक औषधीय पौधा है जो मध्य भारत (मध्य प्रदेश), दक्षिण भारत और श्रीलंका में पाया जाता है यह बेल (लता) के रूप में होता है। इसकी पत्ती को खा लेने पर किसी भी मीठी चीज का स्वाद लगभग एक घंटे तक के लिए समाप्त हो जाता है और वह खाने पर रेत के समान लगती है। इस विशेषता के कारण स्थानीय लोग इसे गुड़मार के नाम से पुकारते हैं।

Gurmar plants Image, Benefits, Uses & Side Effects in Hindi

Gurmar

गुडमार का विभिन्न भाषाओं में नाम (Gurmar Called in Different Languages)

वैज्ञानिक नामGymnema sylvestre (जिमनेमा सिल्वेस्ट्रे)
अंग्रेज़ीPeriploca of the wood
हिंदीगुड़मार, मेधासिंगी
गुजरातीकावली, मेधसिंगे
मराठीकावली, मेधासिंगी, बेडकीचा पाला
बंगालीमेषशृंग
कन्नड़ काढ़ासिगे
तमिलशिरुकुरूम काय, शक्करइक्कोल्ली
मलयालम कर्राक्कोल्ली, मधुनाशिनी

गुडमार का सामान्य परिचय (introduction of Gurmar in Hindi)

गुडमार एक विशाल काष्ठीय लता है। इसकी जड़ों में गाठें होती है। इसकी पत्तियाँ अण्डाकार, संकीर्ण सिरों और चौड़े आधार वाली होती है। पत्तियाँ लगभग 6 से 12 मिमी लंबे होते है। इसके फूल छोटे, पीले और भाले के समान नुकीले होते है। बीज पतले होते हैं।

गुडमार का विभन्न रोगों में प्रयोग (Use of Gurmar in various diseases in Hindi)

यह भूख-मूत्र वर्धक और टाँनिक के रूप मे उपयोग की जाने वाली औषधीय है। यह अग्नाशाय से शर्करा को हटा देती है इसलिए इसका प्रायः मधुमेह के उपचार के लिए किया जाता है।

मधुमेह: मधुमेह के उपचार में सूखी पत्तियों का चूर्ण दिन में 2-3 बार, 5-6 महीने के लिए दिया जाता है। अध्ययन और अनुसंधान से पता चला है कि इस दवा की उच्च खुराक लेने से अग्नाशय की बेसोफिलिक कोशिकाओं को पुनर्जीवन प्रदान करने में सहायता मिलती है। और पढ़ें: मधुमेह रोगियों के लिए डाइट प्लान

मोटापा: 10 ग्राम पत्तियों की पेस्ट को 100 मिली० पानी में 25 मि०ली० क्वाथ ( काढ़ा) रहने तक उबालें। मधुमेह, मोटापा और खून में मौजूद कोलेस्ट्रॉल की उच्च मात्रा की स्थिति में दिन में 2 बार, 3-4 सप्ताह तक इस क्वाथ को दिया जाता है।

घाव: गुड़मार की जड़ के चूर्ण का पेस्ट बनाकर घावों पर लगाया जाता है।

कब्ज वात रोग: जठरांत्र विकार जैसे कोष्ठबद्धता (कब्ज) और वात रोगों में पत्तियों के चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा सोने से पहले गरम पानी के साथ सेवन किया जाता है।

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