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अष्टवक्रासन (Eight Angel Pose)

यह आसन राजा जनक (सीता के पिता) के आध्यात्मिक गुरु ‘मुनि अष्टावक्र’ को समर्पित है जो अद्वैत वेदान्त के महत्वपूर्ण ग्रन्थ अष्टावक्र गीता के ऋषि भी हैं। अष्टावक्र और राजा जनक की कथा भी जग प्रसिद्ध है।

अष्टवक्रासन नाम क्यों पड़ा– ‘अष्टावक्र’ का अर्थ ‘आठ जगह से टेढा’ होता है। कहते हैं कि अष्टावक्र का शरीर आठ स्थानों से टेढ़ा था। इसलिए उन्हें ‘अष्टावक्र’ कहा जाता था। चूँकि इस आसन को करते वक्त भी शरीर को आठ जगह से मोड़ा जाता है, इसलिए इसका नाम ‘अष्टवक्रासन’ (Astavakrasana) पड़ा। इसे अँग्रेज़ी में Eight Angle Pose कहते हैं।

This Asana is one of the advanced arm balance poses in yoga. It is an excellent pose to develop stability and equilibrium, while strengthening the wrists and arms.

Astavakrasana
Astavakrasana

अष्टवक्रासन करने की विधि (How to Do Astavakrasana)

Step 1: लगभग डेढ़ फीट की दूरी पर दोनों पैर फैला कर खड़े हो जाएँ।

Step 2: अब घुटनों को मोड़े। ज़मीन पर पैरों के बीच दाहिनी हथेली और बाएँ पैर के थोड़ा आगे बायाँ हथेली रखें। दाहिनी भुजा पर दाहिना पैर इस प्रकार रखें कि दाहिनी कुहनी के ऊपर दाहिनी जांघ का पृष्ठ भाग आए।

Step 3: अब बाऐं पैर को भुजाओं के बीच आगे दाएँ पंजे के पास रखें। श्वास छोड़ें एवं दोनों पैरों को ज़मीन से ऊपर उठाएँ।

Step 4: दाएँ पैर के टखने पर बायाँ पैर रखकर फसाएँ (चित्र देखें) और पैरों को दाहिने तरफ तिरछे रूप में फैलाएँ इस प्रकार दोनों जांघो के बीच दाहिनी भुजा आ जाएगी अब दाहिनी कुहनी को थोड़ा झुका लें। बायीं भुजा सीधी होनी चाहिए।

Step 5: दोनों हाथों पर सन्तुलन स्थापित करें एवं कोहनियाँ मोड़े, ज़मीन के समानान्तर सिर एवं धड़ को लाएँ।

Step 6: यह इस आसन की अंतिम अवस्था है यथा संभव रुके व श्वास लें। भुजाओं को सीधा करें। सिर एवं धड़ ऊपर उठाएँ, पैरों को अलग करें और ज़मीन पर रखें। अपनी मूल अवस्था में आ जाएं और दूसरी तरफ़ से भी इसी क्रिया को दुहराएँ।

श्वासक्रम/समय : पैरों को ऊपर उठाते समय अंतःकुंभक करें अंतिम अवस्था में श्वसन किया सामान्य रखें। पैरों को नीचे करते समय श्वास छोड़ें। और पढ़ें: उष्ट्रासन (Camel Pose)

अष्टवक्रासन करने के लाभ (Benefits of Astavakrasana)

मणिबंध, भुजा व कंधे को मजबूत और सुद्रढ़ता देता है। उदर प्रदेश की क्रियाशील बनाता है। पूरे शरीर में रक्त संचार को विनियमित करता है। चेहरे के ओज-तेज को बढ़ाता है। और पढ़ें: चक्रासन (Wheel Pose)

अष्टवक्रासन करते हुए सावधानियां (Astavakrasana Precautions)

  • इस आसन को किसी एक्सपर्ट की देख-रेख में ही करना चाहिए।
  • सुबह खाली पेट इस आसन को करने से ज्यादा फायदे मिलते हैं।
  • गर्भवती महिला, कमजोर, बीमार, कलाई व कंधों के विकार से ग्रसित व्यक्ति इस आसन को न करें।
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