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अष्टांग नमस्कार (Eight Limbed Pose)

अष्टांग का अर्थ है ‘आठ अंग’ और नमस्कार का अर्थ ‘प्रणाम करना’। अतः अष्टांग नमस्कार का शब्दिक अर्थ हुआ- “शरीर के आठों अंगों (दोनों पैर, दोनों हाथ, दोनों घुटने, छाती एवं ढुड्डी) को झुकाकर नमन करना या प्रणाम करना”।

इस कारण इस आसन को ‘अष्टांग नमस्कारासन’ कहते हैं। इसे अंग्रेजी में Eight Limbed Pose या Salute with eight limbs कहते हैं।

Ashtanga Namaskara
Ashtanga Namaskara


नाम:
अष्टांग नमस्कार
अंग्रेज़ी नाम: Eight Limbed Pose
जटिलता:
सरल
प्रभावित अंग:
पीठ

अष्टांग नमस्कार करने की विधि (How to Do Eight Limbed Pose)

Step 1: सर्वप्रथम पेट के बल उत्तर या पूर्व की दिशा की तरफ़ सिर करके लेट जाएँ।

Step 2: अब दोनों पैर की अंगुलियाँ, दोनों घुटने, दोनों हाथों की हथेलियाँ, छाती व ठुड्डी यह सभी अंग पृथ्वी से स्पर्श करें। यह आसन भगवान को साष्टांग नमस्कार करने जैसा ही है।

श्वासक्रम / समय: स्वाभाविक श्वासप्रश्वास करें। और पढ़ें: सूर्य नमस्कार

अष्टांग नमस्कार करने से लाभ (Benefits of Ashtanga Namaskar)

इस आसन के द्वारा सीना विकसित होता है व भुजाओं (बाँहो), कथों एवं पैरों की हड्डियों को शक्ति मिलती है।

यह आसन मेरुदण्ड के रोग में अति लाभकारी है। यह आसन शरीर को पूर्ण आराम देता है एवं नई चेतना का संचार करता है। मानसिक शांति प्रदान करता है।

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