अंजीर (Fig)

अंजीर (Fig) का वृक्ष भारत मे सर्वसुलभ है, इसके फल को भी अंजीर कहते है। अंजीर का फल, वृक्ष का दूध और अंजीर के पत्ते विविध रोगों में काम आते हैं। अंजीर का फल गूलर की भाँति होता है। यह एक शक्तिदायक फल है।

Anjeer

अंजीर का विभिन्न भाषाओं मे नाम (Anjeer Called in Different Languages)

वैज्ञानिक नामफिकस कैरिका (Ficus carica)
अंग्रेज़ी Fig (फीग)
हिंदीअंजीर
संस्कृतफल्गुजम्, अंजीरकम्, काकोदुम्बरिकाफलम्
गुजरातीअंजीर
मराठीअंजीर
नेपालीफालेदो, अंजीर
बंगालीअंजीर
तेलगूअंजुरा, अंजठ, मेदीपटु
तमिलसीमईयट्टी, सिमाअली
फ़ारसीतेन, तीन

अंजीर का सामान्य परिचय (Introduction of Anjeer)

अंजीर की खेती भी की जाती है और यह अपने आप भी उत्पन्न हो जाता है। अंग्रेजी में इसे ‘Fig’ कहते हैं। काबुल में अंजीर की अधिक पैदावार होती है। हमारे देश में उत्तर प्रदेश, कश्मीर, सूरत, नासिक, मैसूर क्षेत्रों में यह ज्यादा पैदा होता है।

बाह्य स्वरूप: अंजीर का पेड़ 14 से 18 फुट ऊंचा होता है। पत्ते और शाखाओं पर रोएं होते हैं। फूल न लगकर, फल पहले कच्ची हालत में हरे और पकने पर लाल आसमानी रंग के हो जाते हैं।

अंजीर के गुणधर्म (Ayurvedic & Yunani Properties of Anjeer in Hindi)

अंजीर स्वादिष्ट फल, गुणकारी मेवा होने के साथ-साथ कई रोगों में लाभकारी औषधि का भी काम करता है।

आयुर्वेद: आयुर्वेदिक मतानुसार अंजीर का पका फल मधुर, शीतल, भारी, तुष्टि देने वाला, स्वादिष्ठ, वात, पित्त और कफ़, क्षय, रक्त और वायु विकार नाशक है। और पढ़े: जानें, आयुर्वेद की ABCD

यूनानी चिकित्सा: यूनानी चिकित्सा में इसे मधुर, बलवर्धक, बाजीकारक, ज्वर हरने वाला और रेचक कहा जाता है। और पढ़ें: वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति

अंजीर में पौषक तत्व (Nutritional value of Anjeer in Hindi)

Nutritional value of Anjeer: अंजीर में कार्बोहाइड्रेट (शर्करा) 63 %, प्रोटीन 5.5 %, सेल्यूलोज, 7.3 %, चिकनाई 1 %, खनिज लवण 3 %, अम्ल 1.2 %, राख 2.3 % और जल 20.8 % होता है।

इसके अलावा प्रति 100 ग्राम अंजीर में 1.5 मिलीग्राम लोहा, विटामिन A की 270 I.U अल्प में चूना, पोटेशियम, सोडियम, गंधक, फास्फोरिक एसिड और गोंद भी पाया जाता है।

अंजीर का विभिन्न रोगों में प्रयोग (Uses of Fig / Anjeer in various Diseases)

कब्ज़, बवासीर : 3-4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात्रि में सोने से पूर्व खाएं और ऊपर से उसी दूध का सेवन करने से कब्ज़ तथा बवासीर में लाभ होता है। और पढ़ें: कब्ज कारण और उपचार

खांसी और दमा: पके अंजीर का काढ़ा पीने से खांसी दूर हो जाती है। दमा रोग में अंजीर खाना गुणकारी होता है।

मुंह के छाले: अंजीर का रस छालों पर लगने से आराम मिलता है।

दांत दर्द: अंजीर का दूध रुई में भिगोकर दुखते दांत पर रखकर दबाएं। दांत दर्द में लाभ होगा।

बहुमूत्र: 3-4 अंजीर खाकर 10 ग्राम काले तिल चबाने से यह कष्ट दूर होता है।

मुंहासे: कच्चे अंजीर का दूध मुंहासों पर 3 बार लगाएं।

चर्म रोग: पर कच्चे अंजीर का दूध समस्त चर्म रोगों में लगाना लाभदायक होता है।

दुर्बलता: अंजीर और सॉफ को बराबर मात्रा में लेकर चबा-चबाकर नियमित सेवन करने से शारीरिक दुर्बलता दूर कर देता है। और पढ़ें: वजन बढ़ाने के लिए डाइट प्लान

सिरदर्द- अंजीर के वृक्ष की छाल को पीसकर माथे पर लेप करने से तेज सिरदर्द शीघ्र आराम मिलता है। और पढ़ें: माइग्रेन लक्षण और उपचार

श्वसनतंत्र विकार (फेफड़ों के रोग): अंजीर की शाखाओं के छाल का काढ़ा बनाक 10-20 मिली की मात्रा में पीने / पिलाने से फेफड़े के रोग शीघ्र ठीक हो जाते हैं। और पढ़ें: फेफड़ों से सम्बन्धित बीमारियां

श्वासरोग (दमा) – अंजीर का फल और गोरख इमली के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। मिश्रित चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन प्रातःकाल खाने से दमा रोग में लाभ होता है। और पढ़ें: फेफड़ो से संबंधित बीमारियां

हृदयरोग- अंजीर के फल को प्रतिदिन सेवन करने से हृदय संबंधी और धमनी संबंधी सभी रोग ठीक हो जाते हैं।

अजीर्ण (अपचन)- अंजीर के सेवन करने से अजीर्ण रोग (अपच) को शीघ्र दूर करता है। इसके खाने से अपच दूर हो जाता है।

खूनी बवासीर- सूखे अंजार के 2 फल को रात को पानी में भिगोकर रख दें और प्रातःकाल खाली पेट खा लें। पुन: प्रातःकाल 2 अंजीर के फल को पानी में भिगोकर रख दें और उसे रात्रि सोते समय खा लें। ऐसा करने से खूनी बवासीर शीघ्र ठीक हो जाता है।

व्रण दुर्गंध- अंजीर के दूध को दुर्गन्धित व्रण (फोड़े पर) पर लगाने फोड़े से आने वाली दुर्गंध शीघ्र दूर होती हैं।


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